देश भर ने विजय दशमी मनाई, मुम्बई भी रावण का पुतला जलाने में पीछे नहीं रही। लेकिन, हर साल की तरह इस बार भी वहीं यक्ष प्रश्न कितने रावण जलाओगे- ग्लोबल वार्मिंग से लेकर ग्लोबल रिशेसन तक, पड़ोसी (देशों) की टेनशन से लेकर टेरेरिज्म तक, महंगाई से लेकर तनहाई तक, बीमारी से महामारी तक, राजनीति से समाज तक, साहित्य से पत्रकारिता तक, अर्श से फर्श और जीवन के उत्कर्ष (लिंग जांच व भ्रूण हत्या) तक हर डग पर रावण की दहाड़ व धमक महसूस की जा सकती है। फिर भी, हम कहते हैं कि हमने बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मना लिया है, रावण को जला दिया है।
सर्वेश पाठक
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